ग्रेटर नोएडा/कासना थाना क्षेत्र | संवाददाता रिपोर्ट
ग्रेटर नोएडा के पंचायतन गांव से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां शिकायतकर्ता परमाल सिंह और उनके परिवार ने लगातार मारपीट, धमकी, गाली-गलौज और पुलिस की कथित लापरवाही के आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि पिछले एक साल से वे भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं, लेकिन पुलिस ने आज तक किसी भी आरोपित पर ठोस कार्रवाई नहीं की।
सिगरेट मांगने को लेकर शुरू हुआ विवाद, फिर बढ़ते-बढ़ते पहुंचा हमले तक
शिकायतकर्ता के भाई कौशल के अनुसार, विवाद की शुरुआत तब हुई जब उनके 10 साल के बेटे विक्की से पड़ोसी शेखर और उसके पिता रोशन ने सिगरेट लाने को कहा। बच्चे ने इनकार किया, तो उसे डांटकर भगा दिया गया। रोते हुए विक्की ने यह बात घर पर बताई, जिसके बाद कौशल बाहर निकले और मामूली बहस के बाद मामला शांत हो गया।
लेकिन तनाव यहीं खत्म नहीं हुआ।
31 दिसंबर 2023: रात 8 बजे अचानक हमला, घर में घुसकर मारपीट
पीड़ितों ने बताया कि 31 दिसंबर 2024 की रात करीब 8 बजे, 6–7 लोग दो बाइकों पर सवार होकर आए और घर के बाहर जोर-जोर से चिल्लाने लगे। तभी कौशल, उनका भाई गौरव और पिता परमाल सिंह बाहर निकले, तो आरोपियों ने अचानक हमला कर दिया।
गाली-गलौज, धक्का-मुक्की, और लाठी-डंडों से मारपीट के बाद आरोपी भाग निकले।
बार-बार घर पर लौटकर देते रहे धमकियां
परिवार का दावा है कि घटना के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ।
3 से 4 दिनों तक रात 8 बजे आरोपी आते रहे,
घर के बाहर गाली-गलौज करते रहे,
दूसरों की छतों से ईंटें फेंकते रहे
और परिवार को धमकाते रहे।
परमाल का कहना है:
> “हमारा पूरा परिवार दहशत में है। बच्चे रात में सो नहीं पाते। कोई भी सुनवाई नहीं हो रही है।”
पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा… फिर कुछ ही घंटों में छोड़ दिया
पीड़ितों के मुताबिक, 2 जनवरी की शाम पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा भी,
लेकिन 3 जनवरी की शाम छोड़ दिया।
परिवार का आरोप है कि—
> “पुलिस को पैसे देकर मामला रफा-दफा कर दिया गया।”
पीड़ितों का कहना है कि जब वे थाना जाकर FIR दर्ज करवाने जाते हैं, तो उनसे कहा जाता है—
“पहले मेडिकल लेकर आओ… बाद में आना।”
और चक्कर कटवाकर वापस भेज दिया जाता है।
उल्टा आरोपियों ने पीड़ित परिवार पर मुकदमा कर दिया
पीड़ितों का यह भी कहना है कि आरोपियों ने मिलकर उल्टा उन पर ही मुकदमा दर्ज करा दिया है, जिससे परिवार और अधिक परेशान है।
परमाल बताते हैं:
> “जो गुनहगार हैं, वही खुलेआम घूम रहे हैं। उल्टा पुलिस हमें ही परेशान करती है। कई दिन से हम कोर्ट-कचहरी का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं है।”
आरोप—स्थानिय दबदबे के कारण नहीं हो रही कार्रवाई
पीड़ित परिवार ने बताया कि आरोपी लोग “दरभंगा गैंग पार्टी” से जुड़े हुए बताए जाते हैं, जिसके कारण गाँव में उनका दबदबा है और कोई उनके खिलाफ खड़ा नहीं होता।
परिवार ने कहा—
> “ये लोग सरेआम घूमते हैं, सीना चौड़ा करके कहते हैं—जो करना है कर लो, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा, लेकिन मामला फिर भी अटका
परमाल सिंह द्वारा न्यायालय में की गई अपील के बाद पुलिस ने शिब्बू, शेखर, बल्लू, भोले, सुमित और कुंवरपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया,
लेकिन कार्रवाई आज तक ढीली ही है।
परिवार का कहना है कि—
> “कोर्ट से लेकर कचहरी तक, हम हर जगह गए… मगर कोई सुनवाई नहीं। रोज जान का खतरा है, बच्चे डर में जी रहे हैं।”
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से लगाई गुहार
परिवार ने यूपी पुलिस, जिला प्रशासन और शासन से मांग की है कि—
1. आरोपियों पर सख्त कार्रवाई हो
2. परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
3. मामले में निष्पक्ष जांच कराई जाए
4. उल्टे दर्ज किए गए मुकदमों की समीक्षा हो
5. थाना पुलिस की लापरवाही पर कार्रवाई की जाए
परिवार का कहना है—
> “हम सिर्फ न्याय चाहते हैं। हम खून खराब आया किसी प्रकार का झगड़ा नहीं चाहते हैं हमें सिर्फ न्याय चाहिए
डर में जीना अब बर्दाश्त नहीं।”
हम मीडिया प्रशासन और उच्च अधिकारियों से हाथ जोड़कर अनुरोध करते हैं कि हमारे इस मामले को समय रहते गंभीरता से लिया जाए नहीं तो इसमें किसी की जान भी जा सकती है क्योंकि यह लोग आज भी झगड़ा करने या मारपीट के लिए उतारू होते हैं आज भी चाहते हैं कि इन्हें सिर्फ मौका मिले ताकि यह झगड़ा मारपीट कर सके
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