बदायूं, उत्तर प्रदेश।
बदायूं जिले के सहजवान क्षेत्र के निवासी विपिन पचौरी और उनके बुजुर्ग पिता राजेंद्र पचौरी आज झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। उनके जीवन की कहानी दर्द और संघर्ष से भरी हुई है। विपिन के अनुसार, जब वे केवल 10 वर्ष के थे, तब उनकी मां विमलेश उर्फ नेहा, अपने दो बेटों दीपक और आकाश के साथ एक दूसरे व्यक्ति के साथ चली गई थीं। बताया जा रहा है कि विमलेश ने दूसरी शादी कर ली और अपने बेटों को मिश्रा परिवार में शामिल करवा दिया।
समस्या तब और गंभीर हो गई जब मिश्रा परिवार ने राजेंद्र पचौरी के नाम पर बने पुश्तैनी मकान पर कब्जा कर लिया। दीपक मिश्रा और आकाश मिश्रा, अब कब्जा कर उस घर में रह रहे हैं, जो कि राजेंद्र पचौरी के नाम से दर्ज है। विपिन का दावा है कि उनकी मां, जिन्होंने उन्हें और उनके पिता को गरीबी में अकेला छोड़ दिया था, अब उसी मकान पर कब्जा कर चुकी हैं, जबकि वे खुद खुले आसमान के नीचे जीने को मजबूर हैं।
विपिन पचौरी ने न्याय और प्रशासन से गुहार लगाई है कि उन्हें उनका हक दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों तक उन्होंने और उनके पिता ने गरीबी में दिन गुजारे, लेकिन अब जब वे थोड़ा सामान्य जीवन जीना चाहते हैं, तो उनके ही नाम की संपत्ति पर दूसरों ने अवैध कब्जा कर लिया है। और उनका हक और बटवारा नहीं दे रहे हैं,
यह मामला प्रशासन
विपिन की मांग है:
मकान पर से गैरकानूनी कब्जा हटाया जाए।
उन्हें और उनके पिता और उन्हें को पुनः उनका घर दिलाया जाए।
मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
स्थानीय प्रशासन और जिला अधिकारी से निवेदन है कि वे इस मामले को गंभीरता से लें और एक बेसहारा पिता-पुत्र को न्याय दिलाएं।
स्थानीय संवाददाता ईखबर मीडिया की रिपोर्ट